Mon. Jun 1st, 2020

ब्लडप्रेशर (रक्तचाप ) क्या होता है ?

ब्लडप्रेशर

रक्तचाप रक्त वाहिका की दीवारों के खिलाफ रक्त के बल को मापने का उपाय है ह्रदय रक्त  रक्त  को धमिनियो  में पम्प  करता  है जो  पूरे शरीर में  रक्त ले जाता  है.  उच्च  रक्तचाप  खतरनाक  है  क्यूकि यह ह्रदय  को  शरीर  से  रक्त  पम्प  करने  के लिए  कठिन  काम  करता  है  और  धमिनियो स्ट्रोक गुर्दे की  बीमारी  और  ह्रदय  की  विफलता के   विकास  में  योगदान देता  है. हमारी रक्त वाहिनियो  पर   पड़ने  वाले  खून  के  दबाव  को  ब्लडप्रेशर कहते  है इसे  मापने  के  लिए  एक  मशीन  का  उपयोग  करते  है जिसे स्फिग्नोमैनोमीटर  कहते है

आदर्श  ब्लडप्रेशर (सामान्य रक्तचाप)  120/80  माना  जाता  है  इसमे  पहले नंबर  को   सिस्टोलिक  ब्लडप्रेशर  कहा  जाता  है  क्योकि यह  दिल धडकने  के  समय  ब्लडप्रेशर  को  दिखाता  है .दूसरी संख्या को डायस्टोलिक  ब्लडप्रेशर कहते  है क्योकि  ह्रदय  के  दबाव तनाव मुक्त  रहने  के  समय के ब्लडप्रेशर की  सूचना  देता  है

ब्लडप्रेशर के प्रकार

1-हाई ब्लडप्रेशर (उच्च रक्त चाप)

2-लो ब्लडप्रेशर

हाई ब्लडप्रेशर

असमान्य रूप  से  उच्च  रक्तचाप  और  उच्च मनोवैज्ञानिक तनाव के संयोजन को उच्च रक्तचाप के रूप में जाना जाता है।इस  विकार  से पीड़ित इन रोगियों का रक्तचाप रक्तचाप 140 से अधिक 90 मिमी से अधिक होगा।  उच्च रक्तचाप का निदान रक्तचाप को मापकर किया जाता है। सिस्टोलिक दबाव पहले रीडिंग अर्थात होगा। एक दबाव जिससे हृदय शरीर के माध्यम से रक्त पंप करता है, और दूसरा रीड डायस्टोलिक दबाव होगा, जिसका अर्थ है कि एक दबाव जिस पर हृदय आराम  करता  है

हाई ब्लडप्रेशर  के  कारण

सामान्य और स्वस्थ व्यक्तियों में तीव्र तनाव और प्रतिकूल पर्यावरणीय कारक रक्तचाप बढ़ाने के मुख्य कारक हैं।प्रचलित स्थिति की बढ़ती दर को ज्यादातर जीवन शैली और आहार संबंधी कारकों जैसे कि निष्क्रिय आदतों, प्रसंस्कृत वसायुक्त खाद्य  पदार्थो  से  उच्च आहार सोडियम सामग्री, तंबाकू और शराब के उपयोग पर दोषी ठहराया जाता है।

हाई ब्लडप्रेशर के लक्षण

  • भयानक सरदर्द
  • थकान या भ्रम
  • बहुत घबराहट या चिंता होना
  • नज़रों की समस्या
  • छाती में दर्द
  • सांस लेने मे तकलीफ
  • अनियमित दिल की धड़कन
  • नाक से खून निकलना
  • मूत्र में खून आना

हाई ब्लडप्रेशर से  बचने  के  उपाय

नियमित व्यायाम करके:निष्क्रिय लोगों के मुकाबले सक्रिय लोगों को है हाई ब्लडप्रेशर होने का खतरा 20-50% तक कम होता है. ज़रूरी नहीं की इसके लिए आप जिम जाएं, सुबह टहलना ,योग, या घर के काम करके भी आप शारीरिक रूप से सक्रिय रह सकते हैं.

नमक का सेवन कम करके: नमक हमारे शरीर में पानी को बनाए रखने में सहायक होता है. लेकिन अधिक नमक खाने से शरीर में जो ज्यादा पानी स्टोर होता है वो रक्त चाप को बढ़ा देता है.

इसलिए, यदि आप खाने में नमक कम लेते हैं तो आपको BP की समस्या होने की सम्भावना कम होती है.

धुम्रपान / शराब का सेवन ना करें या बहुत कम करें: अधिक शराब पीना आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. बेहतर तो होगा कि आप शराब पिए ही नहीं, लेकिन अगर पीते भी हैं तो दिन-भर में 1-2 ड्रिंक से अधिक नहीं. इसी तरह यदि आप सिगरेट स्मोकिंग छोड़ पाएं तो ये भी आपका बीपी कम करने में मदद करेगा.

लो ब्लडप्रेशर

सामान्य तौर पर किसी भी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 के स्तर पर होना नॉर्मल होता है और इसमें थोड़ा बहुत अंतर भी सामान्य होता है। लेकिन यदि इसका स्तर 90/60 या उससे भी कम है, तो इसे निम्न रक्तचाप या लो  ब्लडप्रेशर माना जाता  है

लो ब्लडप्रेशर का कारण

लो बीपी के कई कारण हो सकते हैं जैसे शरीर में पानी की कमी, दवाई का बुरा असर, सर्जरी या गंभीर चोट के कारण, जेनेटिक, स्ट्रेस, ड्रग्स, खाने से जुड़ी खराब आदतें, ज्यादा भूखा रहना आदि।  लो  ब्लड प्रेशर दिल की बीमारी की ओर भी इशारा करता है, क्योंकि खून का बहाव सीधे तौर पर दिल की पंपिंग की क्रिया पर निर्भर करता है। ऐसे में आर्टरी में किसी प्रकार की दिक्कत ब्लड पंप करने में दिक्कत पैदा कर सकती है, जो शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचने देती।

लो ब्लडप्रेशर  के  लक्षण

  • चक्कर आना
  • आंखों के सामने अंधेरा छाना
  • धुंधला दिखाई देना
  • उल्टी जैसा होना
  • थकान होना
  • ध्यान लगाने में परेशानी होना
  • हाथ-पैर ठंडे होना
  • चेहरा सफेद पड़ना
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • खाने में परेशानी होना

लो ब्लडप्रेशर  से  बचने  के  उपाय

चोकर युक्त आटा : गेहूं व चने के आटे को बराबर मात्रा में लेकर बनाई गई रोटी खूब चबा-चबाकर खाएं, आटे से चंदा न खाएं।

यह ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में बहुत मददगार होता है।

ब्राउन राइस  : भूरे चावल का इस्तेमाल करें, इसमें नमक, कोलेस्टरोल और चर्बी नाम केवल की होती है। यह हाई ब्लड प्रेशर रोगी के लिए बहुत लाभदायक भोजन है।और पढने के लिए यहाँ क्लिक करे >>> 

लहसुन : लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है ब्लडप्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्टोलिक सिस्टम में भी राहत देता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के रोगियों को रोजाना खाली पेट एक लहसुन की कली खानी चाहिए।और पढने  के  लिए  यहाँ  क्लिक  करे  >>

आंवला : वैसे तो आंवला काफी बीमारियों में मदद करता है  लेकिन आंवला ब्लड प्रेशर के लिए भी बहुत राहत पहुंचाने वाला है। आंवला में विटामिन सी होता है। यह रक्त परिसंचरण को ठीक करता है और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखता है।

 

 

 

 

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