Sat. Jul 4th, 2020

गर्भावस्था में रखेगी यह ध्यान तो बीमारियों के चक्रव्यूह में नही फंसेगा अभिमन्यू

माँ की  कोख  में  ही मधुमेह  व् एनीमिया के इलाज के लिए प्रिवेंटिक हेल्थकेयर की कार्ययोजना , जानिए क्या है कहानी,

वाराणसी :-

जीवनशैली में परिवर्तन व कम का तनाव  लोगो को तेजी से बीमार करता जा रहा है  ,मधुमेह  हाइपरटेंशन आदि ऐसी बीमारी है जो तेजी से लोगो को पीड़ित करती जा रही है,सबसे अधिक दिक्कत  इन  बीमारियों  से पीड़ित  गर्भवती महिलाओ  को  होती  है, ऐसे में गर्भवती  महिला  पहले से इन चीजो का ध्यान रखेगी तो उनका अभिमन्यू बीमारियों के चक्रव्यूह  में नही फसेगा

बनारस के एक तारांकित होटल में गुरुवार को गाइनकोलोजिस्ट  डा. हेमा दिवाकर  ने बताया की हमारे देश में 80 मिलियन तक डायबीटीज  पहुंच चुकी है, अगले  दशक में पीडितो की संख्या  74 प्रतिशत इजाफा  होने की सम्भावना  है  यदि  मोटापा  हाइपरटेंशन व एनीमिया से पीड़ितो की संख्या को जोड़ दिया जाये तो इनकी संख्या बहुत अधिक हो जाएगी,इंटरनेशनल फेडरेशन  ऑफ़ गाइनकोलोजी  आब्सीटीट्रिक्स  (फिगो )की  डा.हेमा की  हमारे  हेल्थ  सेंटर के पास गैरसंचारी  बीमारियों  के प्रसार का  सामना करने के लिए पर्याप्त ढांचा नही है,इसका समाधान कोख में ही करना जरूरी है , मेडिकल साइंस इतना आगे बढ़ चुका है की  अब माँ  की कोख  में ही  मधुमेह  व एनीमिया  की पहचान  करके  उसका  रोकथाम  किया जा सकता है ,डा. मोहसे एचओडी  चेयर पीएनसीडीसी फिगो  ने बताया की विकाशशील देशो में  गर्भवती महिलाओ  में  एनीमिया  व  मधुमेह  की  जाँच  व स्क्रीनिंग  की  अच्छी सुविधा नही है,ऐसे  हालात  में  डिवाइस के माध्यम से गर्भवती महिला अनुशासित जीवन जी सकती है , फिगो पीएनसीडीसी की सदस्य  डा.लियोना  ने कहा  की हांगकांग के  माडल  को  भारत में  अपनाया  जा  सकता है,भारत  में ऐसी  मजबूत  व्यवस्था  होनी  चाहिए,इससे  गर्भवती  महिलाओ  की जाँच  सही  ढंग  से किया   जा सके, डा. राजेश जैन ने कहा की  केंद्र व राज्यों की विभिन्न एजेंसियों को आपस में जुड़कर सहयोग के साथ काम करने  की आवश्यकता है , मल्टीस्टेकहोल्डर  इंगेजमेंट व फिट  इंडिया  अभियान  में  सहयोग करने की जरूरत है ,उन्होंने कहा की  फिगो ने भारत में सार्वजनिक व निजी अस्पतालों में हेल्थ केयर सेवा की क्षमता बढ़ाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट लांच किया, जो गर्भवती महिलाओ में मधुमेह व एनीमिया के लक्षण की बेहतर स्क्रीनिंग कर सकेगा, अभियान के तहत पिछले डेढ़ साल में 1200 डाक्टर व 844 स्टाफ  नर्सो को  ट्रेनिग  दी जा चुकी  है ,उन्होंने  कहा की महिलाओ  को खुद  इन  बीमारियों  के प्रति सजग रहने की जरूरत है और गर्भवती  होने  से पहले  ही सारी  जाँच करा लेती है तो स्वस्थय बच्चे के जन्म में  आने वाली  बाधा दूर  हो जायेगी

यह  पूरा  आर्टिकिल वाराणसी  पत्रिका से लिया गया  है जिसका लिंक यह है <<यहाँ क्लिक करे>>  

 

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